संदेश
एक और अर्थ - कविता - अमित राज श्रीवास्तव 'अर्श'
कभी-कभी एक स्मृति अपना चेहरा उतारकर हमारी तरफ़ रख देती है, और हम समझते हैं ये हम हैं। पर वो हम नहीं— हमारी सम्भावना होती है, जो किस…
ओ प्यारे मेरे! आँखें खोल! - कविता - साई अनमोल
मैं दीपक तो तुम लौ बन जाना पवमान चतुर तुमको ले लेगी? ना.. ना.. तुम मुझमें ही समाना; अरे प्यारे अब तो जाग ज़रा! दृष्टि कुछ मुझपे डाल ज़रा…
आदमी टूट जाता है - कविता - प्रवीन 'पथिक'
बहुत कुछ टूट जाता है, छूट जाता है; जब आदमी ख़ुद से रूठ जाता है। एक खालीपन से, उसका जीवन भर जाता है। जब वह खो जाता है, किसी का हो जाता …
अवगुण सदा रहे हैं - कविता - हेमन्त कुमार शर्मा
अवगुण सदा रहे हैं, निश्चय भी सदा रहा। लाख बार गिर जाऊँ, फिर उठना है, मन में यह सदा रहा है, निश्चय भी सदा रहा है। भावुक थे निर्णय मस्ति…
प्रकृति से सीख - कविता - उमेन्द्र निराला
नदियाँ बहती हैं, निरंतर बहती हैं। चट्टानों को भी काटकर, मंज़िल पाने को बहती हैं। पर्वत खड़े हैं, सदियों से खड़े हैं। सब कुछ सहकर भी अड…
अधर पर सँवारूँ तुझे - कविता - चक्रवर्ती आयुष श्रीवास्तव 'जानिब'
साँझ की तीर पर बैठकर निहारूँ तुझे, स्वप्न की ओट से मैं पुकारूँ तुझे। भाव मेरे सिमटते रहें मौन में, शब्द बनकर अधर पर सँवारूँ तुझे। नील …
अमर निशानी - कविता - मयंक द्विवेदी
जब रण में असि ललकार लगाती है, जब बात स्वाभिमान की आती है, जब चंद्रहास के अट्टहास पर, दसों दिशाएँ सो जाती हैं, तब हाड़ी शीश थाल सजाती ह…
नए चित्रकार - कविता - बिंदेश कुमार झा
मकान में नए लोग आने लगे हैं, दीवार के दाग़ साफ़ होने लगे हैं। यह दाग़ नहीं है, चित्रकारी है, इसमें पेंसिल, चौक और किलकारी है। एक बड़े कल…
बच्चे की दुनिया - कविता - श्याम नन्दन पाण्डेय
एक बच्चा मेले के रास्ते में पिता की अंगूलियाँ पकड़कर इठलाता है जैसे पूरी दुनिया मुट्ठी में भर ली हो। हाथ छोड़कर भागना चाहता है खिलौनो …
युवा हूँ मैं - कविता - रामानंद पारीक
नई सोच की उड़ान हूँ मैं संस्कारों का मान हूँ, दो पीढ़ी को साध सके जो मैं ऐसी पहचान हूँ। अदम्य सा उत्साह हूँ मैं श्रेष्ठता की राह हूँ, …
छोटा-सा कोना - कविता - वैष्णवी पाण्डेय
घर में एक छोटा-सा कोना है जो मेरा है जब कभी आशंका और निराशा से मन आतंकित हो उठाता है जब कभी पाती हूँ ख़ुद को खड़ा सवालों के घेरे में …
यही बुद्ध हैं - कविता - सुरेन्द्र प्रजापति
एक शब्द जो बड़ी क्रूरता से उछाला गया घृणा की आग पर तपाया गया उड़ाया गया उपहास तीखे वचनों से दूरदुराया गया "दुर हटो! दुर हटो!!"…
दोस्त - कविता - विभा
बचपन जिसके संग जिया, पर खिलौना न अपना साझा किया। जिसके बिन न खेल पाए, संगी, साथी, हमजोली— वही तो दोस्त कहलाए। जीवन का हर पाठ पढ़ा, तुझ…
श्री महाकाल तांडव स्तुति - संस्कृत काव्य - बाल कृष्ण मिश्रा
सदाशिव शंकर महेश्वर महेश, परमेश्वर त्रिलोचन त्रयंबक त्रिनेत्र। ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय, भव-भय हरन भोलेनाथ, जय जय शिव शंकराय॥ प्रचंड-त…
न आदि न अंत - कविता - प्रवीन 'पथिक'
हर रोज़ एक वही विचार आता है मेरे मन में; उसी रंगीन चिड़िया की भाँति जो मेरे नीम के पेड़ पर लगे घोंसले में चुपके से आती है। और चहचहाते ह…
विश्व गुरु: भारत - कविता - देवेंद्र मणि पाण्डेय
मेरे भारत वासियों, इस जग को फिर से राह दिखाओ। ज्ञान–योग और पराक्रम से, भारत माता का मान बढ़ाओ। जहाँ वेदों की वाणी गूँजे, उपनिषदों का …
एक बात - कविता - डॉ॰ विजय पंडित
एक बात है जो साझा करनी है आपसे... लेकिन मिलने पर दो दिन... दो दिल... कुछ अल्फ़ाज़ और कुछ अहसास वक्त मिले तो ज़रूर बताना कोई भी बहाना न बन…
थोड़ी-सी रोशनी - कविता - अमित राज श्रीवास्तव 'अर्श'
पलकों पर ठहरी नमी अब शब्द नहीं खोजती, बस रिसती है अनकहे अपराध-भाव की तरह। भीतर का शोर इतना भारी हो गया है कि मौन भी टूटकर गिरता है चूर…
अधूरी कविताएँ - कविता - प्रवीन 'पथिक'
आख़िरी साँसों तक पूर्ण नहीं होता जीवन का उपन्यास। कुछ शेष रह जाती हैं, प्रेम कविताएँ; छंद नहीं बनते उस क्षण के, टूट जाती हैं महत्वाकांक…
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