संदेश
अपने हिस्से का पहाड़ - कविता - मोहित नेगी 'मुंतज़िर'
अल्पायु में ब्याही गई उनकी माऐं उन्हें छोड़ने आई हैं सड़क तक। सुबह की पहली बस से, वे नवयुवा जा रहे हैं रोज़गार की तलाश में शहरों की ओर। …
छोटी-सी आशा - कविता - मदन लाल राज
बंजर धरती पर अंकुर क्या फूटा! उपजाऊ भूमि भी तिलमिला उठी। जब जुगनू की छोटी-सी आशा से अंधेरे में रोशनी झिलमिला उठी। मदन लाल राज - नई दि…
लूट लिया इस पल को किसी ने - नज़्म - सुनील खेड़ीवाल 'सुराज'
लूट लिया, इस पल को किसी ने, कोई हर पल, लुटाता रहा अक्सर कल की चाह में, बशर, अपना ये आज गँवाता रहा। ना मिली, ना मिलेगी दौलत इतनी कि आरज…
माशूका- कविता - प्रवीन 'पथिक'
बशर यूँ किसी से बेइंतहा मोहब्बत करता है। जिसके ख़्यालों में, शाम-ओ-सहर; जिसे पाने की चाहत में ताउम्र गुज़ार देता है। फ़कत इतनी आरज़ू …
गद्य मे कविता कह रही है - कविता - हेमन्त कुमार शर्मा
अवगुण सदा रहे हैं, निश्चय भी सदा रहा। लाख बार गिर जाऊँ, फिर उठना है, मन में यह सदा रहा है, निश्चय भी सदा रहा है। भावुक थे निर्णय मस्ति…
विरह का सौंदया - कविता - डॉ॰ सुनीता सिंह
विरह केवल पीड़ा नहीं, यह एक गहन साधना है, जहाँ हर आँसू के भीतर, प्रेम की ही कामना है। तेरे जाने के पश्चात भी, तू मुझमें ही बसा रहा, हर…
हमसफ़र - गीत - सुन्दर लाल डडसेना 'मधुर'
जीवन की कठिन डगर में, जो सदा साथ निभाए। सुख-दुख की हर घड़ी में, मुस्कान से राह सजाए॥ वही तो मेरा हमसफ़र… वही तो मेरा हमसफ़र॥ तूफ़ानों …
नन्हें क़दम - गीत - डॉ॰ राम कुमार झा 'निकुंज'
नन्हे क़दमों से धरती पर, सपनों का विस्तार, हँसी में झरते मोतियों-सा, निर्मल उसका प्यार। मुट्ठी में सूरज बाँध चले, चाँद को करें इशारा, ब…
एक और अर्थ - कविता - अमित राज श्रीवास्तव 'अर्श'
कभी-कभी एक स्मृति अपना चेहरा उतारकर हमारी तरफ़ रख देती है, और हम समझते हैं ये हम हैं। पर वो हम नहीं— हमारी सम्भावना होती है, जो किस…
ओ प्यारे मेरे! आँखें खोल! - कविता - साई अनमोल
मैं दीपक तो तुम लौ बन जाना पवमान चतुर तुमको ले लेगी? ना.. ना.. तुम मुझमें ही समाना; अरे प्यारे अब तो जाग ज़रा! दृष्टि कुछ मुझपे डाल ज़रा…
आदमी टूट जाता है - कविता - प्रवीन 'पथिक'
बहुत कुछ टूट जाता है, छूट जाता है; जब आदमी ख़ुद से रूठ जाता है। एक खालीपन से, उसका जीवन भर जाता है। जब वह खो जाता है, किसी का हो जाता …
मन को केन्द्रित करो लक्ष्य में - मुक्तक - शिव शरण सिंह चौहान 'अंशुमाली'
मन को केन्द्रित करो लक्ष्य में पथ स्वमेव मिल जाएगा। एकाहारी प्रभु का चिन्तन मार्ग तुम्हें दिखलाएगा। सोते जगते बैठ प्रसाधन खाते पीते प्…
स्वाभिमान की अग्निपरीक्षा - कहानी - डॉ॰ पीताम्बरी
कॉलेज के स्टाफ रूम की वह दोपहर कुछ अलग थी। खिड़की से छनकर आती धूप वैदेही की मेज पर बिखरी कॉपियों पर सुनहरी लकीरें खींच रही थी। चारों ओ…
हनुमत अमृतवाणी - गीत - महेश कुमार हरियाणवी
जय राम भक्त हनुमान जी, जय सेवक लखन महान की। जय ज्ञान के दीप ईमान की, महाबली वीर हनुमान की॥ अमर अजर अचरज है माया, वज्र कठोर सशक्त है का…
अवगुण सदा रहे हैं - कविता - हेमन्त कुमार शर्मा
अवगुण सदा रहे हैं, निश्चय भी सदा रहा। लाख बार गिर जाऊँ, फिर उठना है, मन में यह सदा रहा है, निश्चय भी सदा रहा है। भावुक थे निर्णय मस्ति…
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