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विधा/विषय "अमीर"
किरदार - कविता - पुनेश समदर्शी
गुरुवार, मार्च 11, 2021
असली किरदार को कोई जानता नहीं, नकली किरदार के चर्चे बड़े हैं। सच्चे ग़रीब की कोई मानता नहीं, झूठे अमीर के साथ खड़े हैं। नसीब नहीं दो रो…
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