माँ कालरात्रि देवी - दोहा छंद - डॉ॰ राम कुमार झा 'निकुंज'
शनिवार, अक्टूबर 17, 2026
शुभ दिन आए सप्तमी, कालरात्रि अवतार।
भय-तम-खल-दलहारिणी, दे साहस उपहार॥
महाकाल भयकारिणी, माँ फल दे सन्तान।
दुष्ट दलन कर भक्त को, देती शुभ वरदान॥
कालरात्रि की कृपा से, मिटे सकल संताप।
हर साधक निर्भय बने, मिटे पाप अभिशाप॥
शूलधारिणी कालिका, करती शत्रु विनाश।
भक्तों के जीवन सुपथ, भरती नव विश्वास॥
गर्दभवाहन वाहिका, माँ का रूप अपार।
अंधकार को हर रहीं, ज्योतिर्मय संसार॥
दें कल्याणक दान माँ, हरे नकारी सोच।
माँ के चरणों में मिले, सच्चरित्र संकोच॥
शुभंकरी माँ कालिका, करती सब कल्याण।
पल-पल संकट माँ हरे, सुखदा मातु प्रणाम॥
दुष्ट दलन कर साधु हित, करती माँ उद्धार।
भक्ति भाव से जो झुके, पा जीवन सुखसार॥
शांति शक्ति साहस विजय, देती माँ आशीष।
कालरात्रि पूजन मुदित, सुरभित सुमन शिरीष॥
माँ चामुण्डा तारिणी, भद्रकालिका नाम।
रक्तबीज शोणित पिओ, करो धरा सुखधाम॥
साहित्य रचना को YouTube पर Subscribe करें।
देखिए साहित्य से जुड़ी Videos
साहित्य रचना कोष में पढ़िएँ
विशेष रचनाएँ
दीपावली विशेष रचनाएँ: कविता, गीत, दोहे और मुक्तक का सुंदर संकलन
सुप्रसिद्ध कवियों की देशभक्ति कविताएँ
अटल बिहारी वाजपेयी की देशभक्ति कविताएँ
फ़िराक़ गोरखपुरी के 30 मशहूर शेर
दुष्यंत कुमार की 10 चुनिंदा ग़ज़लें
कैफ़ी आज़मी के 10 बेहतरीन शेर
कबीर दास के 15 लोकप्रिय दोहे
भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है? - भारतेंदु हरिश्चंद्र
पंच परमेश्वर - कहानी - प्रेमचंद
मिर्ज़ा ग़ालिब के 30 मशहूर शेर

