नंद के नंदलाल - कविता - कवि कुमार प्रिंस रस्तोगी

नंद के नंदलाल 
तुमने कियो कमाल,
जन्म धरा पर लेकर 
किया सबका उद्धार।

बिना दरस न राधा के 
न आँखे खोली कान्हा ने,
बालपन मे माखन चोरी 
चकित किया था कान्हा ने।

मईया यशोदा को तुमने जब 
मुख मंडल मे भव सार दिया,
बड़े-बड़े दानव को 
बचपन मे ही तार दिया।

प्रेम के बंधन को तुमने जब 
राधा संग सखियों से बाँध लिया,
धर्म युद्ध कर जब तुमने 
कौरव-पांडव का साथ दिया।

लड़े भूमि पर महाभारत 
मानव धर्म साकार किया,
मानव मुक्ति का मार्ग दिया
परमब्रम्ह पर्मेश्वर ने जब रूप लिया।

कवि कुमार प्रिंस रस्तोगी - सहआदतगंज, लखनऊ (उत्तर प्रदेश)

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