ज़िंदगी में ऐसे पल भी आते है - कविता - अंकुर सिंह

ज़िंदगी में ऐसे पल भी आते है,
नाखुश होकर भी हम खुश हो लेते है।
ग़म चाहें जितने हो इस दिल में,
दफ़न कर उन्हें सीने में जी लेते है।।

लाख जिम्मेदारियों का बोझ लादें,
विचलित होते हम डगर में दाएं-बाएं।
आने वाले अच्छे कल के चक्कर में,
अपने सगे को बना देते हम पराए।।

ज़िंदगी में भी ऐसा एक पल आएगा,
धन-धान्य से बढ़, खून का रिश्ता कहलाएगा।
रोब जितना भी झाड़ लो इस तन पर
अंत समय में मोहन ही बेड़ा पार लगाएगा।।

मिला है यारों तुमको श्रेष्ठ मानुष का तन,
प्रभु के भक्ति को कर लो अब चिंतन।
हाय ! हाय ! जितना भी कर लो प्यारे,
साथ में तुम्हारे ना जायेगा कागज के ये धन।।

ज़िंदगी में एक पल ऐसा भी आएगा,
बैठ यम के वाहन पर यम लोक को तू जाएगा।
कर ले आज अपने कर्मो का हिसाब,
भरी सभा में यम को क्या बतलाएगा।।

अंकुर सिंह - चंदवक, जौनपुर (उत्तर प्रदेश)

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