टूटे दिल की पीर हुई मैं - ग़ज़ल - ममता शर्मा 'अंचल'

टूटे दिल की पीर हुई मैं - ग़ज़ल - ममता शर्मा 'अंचल' | Ghazal - Toote Dil Ki Peer Hui Main. प्रेम पर ग़ज़ल, Love Ghazal
अरकान :  फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ेलुन
तक़ती : 22  22  22  22

टूटे दिल की पीर हुई मैं,
बिन राँझे की हीर हुई मैं।

इश्क़ के गहरे तीर सहे हैं,
दर्द भरी जागीर हुई मैं।

सूनी रातें, सूना आँगन,
यादों की ज़ंजीर हुई मैं।

अपनी ही तक़दीर से हारी,
क़िस्मत की तदबीर हुई मैं।

आईने से पूछ रही हूँ,
किसकी ये तस्वीर हुई मैं।

ख़्वाब सभी बे-रंग हुए पर,
उनकी ही ताबीर हुई मैं।


Instagram पर जुड़ें



साहित्य रचना को YouTube पर Subscribe करें।
देखिए साहित्य से जुड़ी Videos