ममता शर्मा 'अंचल' - अलवर (राजस्थान)
टूटे दिल की पीर हुई मैं - ग़ज़ल - ममता शर्मा 'अंचल'
शुक्रवार, मार्च 13, 2026
अरकान : फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ेलुन
तक़ती : 22 22 22 22
टूटे दिल की पीर हुई मैं,
बिन राँझे की हीर हुई मैं।
इश्क़ के गहरे तीर सहे हैं,
दर्द भरी जागीर हुई मैं।
सूनी रातें, सूना आँगन,
यादों की ज़ंजीर हुई मैं।
अपनी ही तक़दीर से हारी,
क़िस्मत की तदबीर हुई मैं।
आईने से पूछ रही हूँ,
किसकी ये तस्वीर हुई मैं।
ख़्वाब सभी बे-रंग हुए पर,
उनकी ही ताबीर हुई मैं।
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