पहेली - कविता - प्रियंका चौधरी परलीका

जीवन की पहेली में 
तुम उलझते जाना 
तुम्हें अच्छा लगेगा ।

तुम कोशिश मत करना 
कहीं ठहरकर,
जीवन की पहेली को 
सुलझाने की.....

जीवन की उलझी पहेली को, 
सुलझाने में तुम्हें...
लग जायेंगे वर्ष

तुम जीवन की पहेली को 
सुलझाने के चक्कर में ।
उलझते जाओगे समय की पहेली में ।

एडवोकेट प्रियंका चौधरी परलीका - परलीका, नोहर, हनुमानगढ़ (राजस्थान)

साहित्य रचना को YouTube पर Subscribe करें।
देखिये हर रोज साहित्य से जुड़ी Videos