अवगुण सदा रहे हैं - कविता - हेमन्त कुमार शर्मा

अवगुण सदा रहे हैं - कविता - हेमन्त कुमार शर्मा | Hindi Kavita - Avagun Sada Rahe Hain - Hemant Kumar Sharma | अवगुण पर कविता
अवगुण सदा रहे हैं,
निश्चय भी सदा रहा।

लाख बार गिर जाऊँ,
फिर उठना है,
मन में यह सदा रहा है,
निश्चय भी सदा रहा है।

भावुक थे निर्णय
मस्तिष्क के,
काम हृदय से लिया है,
निश्चय भी सदा रहा है।

आहत है मन
उपेक्षा से,
अपना 
वर्षों एक पता रहा है,
निश्चय भी सदा रहा है।

अवगुण सदा रहे हैं,
निश्चय भी सदा रहा है।


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