अवगुण सदा रहे हैं - कविता - हेमन्त कुमार शर्मा
सोमवार, मार्च 16, 2026
अवगुण सदा रहे हैं,
निश्चय भी सदा रहा।
लाख बार गिर जाऊँ,
फिर उठना है,
मन में यह सदा रहा है,
निश्चय भी सदा रहा है।
भावुक थे निर्णय
मस्तिष्क के,
काम हृदय से लिया है,
निश्चय भी सदा रहा है।
आहत है मन
उपेक्षा से,
अपना
वर्षों एक पता रहा है,
निश्चय भी सदा रहा है।
अवगुण सदा रहे हैं,
निश्चय भी सदा रहा है।
साहित्य रचना को YouTube पर Subscribe करें।
देखिए साहित्य से जुड़ी Videos
साहित्य रचना कोष में पढ़िएँ
विशेष रचनाएँ
सुप्रसिद्ध कवियों की देशभक्ति कविताएँ
अटल बिहारी वाजपेयी की देशभक्ति कविताएँ
फ़िराक़ गोरखपुरी के 30 मशहूर शेर
दुष्यंत कुमार की 10 चुनिंदा ग़ज़लें
कैफ़ी आज़मी के 10 बेहतरीन शेर
कबीर दास के 15 लोकप्रिय दोहे
भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है? - भारतेंदु हरिश्चंद्र
पंच परमेश्वर - कहानी - प्रेमचंद
मिर्ज़ा ग़ालिब के 30 मशहूर शेर

