मैं लिखूँगा - कविता - देवा यादव

मैं लिखूँगा - कविता - देवा यादव | Hindi Kavita - Main Likhoonga - Deva Yadav
मैं लिखूँगा,
और तब तक लिखूँगा,
जब तक मेरी उँगलियाँ साथ देगी। 
जब तक मेरी आत्मा न मात देगी।।

मैं लिखूँगा,
लिखूँगा वो सब,
जो शायद तुम कहने से डरते हो ।
और रोज़ तिल-तिल सोचकर मरते हो।।

मैं लिखूँगा,
बेटियों की चीख़ लिखूँगा।
मैं लिखूँगा,
भिखारी की भीख लिखूँगा।।

मैं लिखूँगा,
ग़रीब पर हुआ अत्याचार लिखूँगा।
मैं लिखूँगा,
बच्चों पर हुई मार लिखूँगा।।

मैं लिखूँगा,
उस पर जो तुम्हारे अधिकारों को मौन बनाए।
मैं लिखूँगा,
उस पर जो तुम पर धौंस जमाए।।

मैं लिखूँगा,
ज़ुल्म की हर दास्ताँ लिखूँगा।
मैं लिखूँगा,
प्रेम का वो रास्ता लिखूँगा।।

मैं लिखूँगा,
तुम्हारे संकेतों की आवाज़ लिखूँगा।
मैं लिखूँगा,
नेताओं का हिसाब लिखूँगा।।

मैं लिखूँगा,
मानवता पर हुआ प्रहार लिखूँगा।
मैं लिखूँगा,
ज्ञानहीन को गँवार लिखूँगा।।

मैं लिखूँगा,
एकता का प्रमाण लिखूँगा।
मैं लिखूँगा,
आती हुई बाढ़ लिखूँगा।।

मैं लिखूँगा,
वीर का बलिदान लिखूँगा।
मैं लिखूँगा,
निकलते हुए प्राण लिखूँगा।।

मैं लिखूँगा,
लाचार की गुहार लिखूँगा।
मैं लिखूँगा,
जीवन का सार लिखूँगा।।

मैं लिखूँगा,
तुम्हारे देह में धँसी,
कीलों की गहराई लिखूँगा।
मैं लिखूँगा,
तुम्हारे संघर्ष की लड़ाई लिखूँगा।।

मैं लिखूँगा,
भूख हड़ताल लिखूँगा।
मैं लिखूँगा,
तुम्हारे एकता की मिसाल लिखूँगा।।

मैं लिखूँगा,
भगत सिंह का इंक़लाब लिखूँगा।
मैं लिखूँगा,
देश को आज़ाद लिखूँगा।।

मैं लिखूँगा।
मैं लिखूँगा।।

देवा यादव - कानपुर देहात (उत्तर प्रदेश)

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