कुछ भाव थे कुछ बनावट - कविता - हेमन्त कुमार शर्मा
सोमवार, सितंबर 09, 2024
कुछ भाव थे कुछ बनावट,
शब्दों में थी हृदय की आहट।
उनकी इनकी गिनी थी पीड़ा,
दूजों के लिए थी यह क्रीड़ा।
दर्ज़ की पंक्तियों में वह अकुलाहट।
छन्दों से भिड़ कर,
अपने भीतर
कुछ मरकर।
जीवन की गाँठ खोलकर,
अधिक चुप कुछ बोलकर,
और थोड़ी सी निज गीतों की लिखावट।
आदर के अक्षर समूह,
निरादर के थे छुपे व्यूह।
जैसे ऊँचे सूरज का झुकना,
जैसे अँधेरे की जगमगाहट।
कुछ भाव थे कुछ बनावट॥
साहित्य रचना को YouTube पर Subscribe करें।
देखिए साहित्य से जुड़ी Videos
साहित्य रचना कोष में पढ़िएँ
विशेष रचनाएँ
दीपावली विशेष रचनाएँ: कविता, गीत, दोहे और मुक्तक का सुंदर संकलन
सुप्रसिद्ध कवियों की देशभक्ति कविताएँ
अटल बिहारी वाजपेयी की देशभक्ति कविताएँ
फ़िराक़ गोरखपुरी के 30 मशहूर शेर
दुष्यंत कुमार की 10 चुनिंदा ग़ज़लें
कैफ़ी आज़मी के 10 बेहतरीन शेर
कबीर दास के 15 लोकप्रिय दोहे
भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है? - भारतेंदु हरिश्चंद्र
पंच परमेश्वर - कहानी - प्रेमचंद
मिर्ज़ा ग़ालिब के 30 मशहूर शेर

