आयो रे नंदलाल - गीत - हिमांशु चतुर्वेदी 'मृदुल'

आयो रे, आयो रे नंदलाल, आयो रे
बाल रूप चित्त छायो रे
माँ जमुना स्पर्श करायो रे
रूप साँवरा मन भायो रे
आयो रे, आयो रे नंदलाल, आयो रे।

माखन मिश्री खायो रे
ग्वालन की मटकी फोड़ी
गोपियों संग रास रचायो रे
लीला संग सहज प्रेम सिखायो रे
आयो रे, आयो रे नंदलाल, आयो रे।

मोर मुकुट, पीताम्बर धारी
रूप मनोहरी, बाँके बिहारी
मधुर मुरली बजायो रे
प्रेम की धुन पे नाचें राधा
दृश्य अलौकिक छायो रे
आयो रे, आयो रे नंदलाल, आयो रे।

करयो पूतना मर्दन
कालिया फन पर, खेल रचायो रे
धारण कियो गोवर्धन कनिष्का पर
इंद्र को सबक़ सिखायो रे
आयो रे, आयो रे नंदलाल, आयो रे।

संहार करयो कंस को
धरा को मुक्ति दिलायो रे
बन सारथी अर्जुन का
धर्म की विजय मार्ग प्रशस्त करायो रे
आयो रे, आयो रे नंदलाल, आयो रे॥

हिमांशु चतुर्वेदी 'मृदुल' - कोरबा (छत्तीसगढ़)

साहित्य रचना को YouTube पर Subscribe करें।
देखिये हर रोज साहित्य से जुड़ी Videos