रमाकांत सोनी - झुंझुनू (राजस्थान)
यादें - कविता - रमाकांत सोनी
मंगलवार, सितंबर 21, 2021
बड़ी सुहानी लगती यादें,
प्रेम भरी मनभावन सी।
उर उमंग हिलोरे लेती,
झड़ी बरसते सावन सी।
सुख-दुख के मेंघ मँडराए,
यादें बस रह जाती है।
घड़ी घड़ी पल पल रहकर,
यादें पुरानी आती है।
हँसी ख़ुशी के सुंदर पल,
रह रहकर याद आते हैं।
जैसे बहती सरिता धारा,
किनारे रह जाते हैं।
गाँव की जब याद आए,
सुकून देती ठंडी बहार।
मन मयूर नाच उठता,
उर उमड़ता हर्ष अपार।
निर्भय रह स्वछंद घूमना,
जोश नया जगा देती।
पाठशाला की यादें भी,
बचपन की सैर करा देती।
उल्लास ख़ुशी घट उमड़े,
जीवन राह दिखाती है।
यादें बने ज्योति जीने की,
उन्नति पथ बतलाती है।
साहित्य रचना को YouTube पर Subscribe करें।
देखिए साहित्य से जुड़ी Videos
साहित्य रचना कोष में पढ़िएँ
विशेष रचनाएँ
दीपावली विशेष रचनाएँ: कविता, गीत, दोहे और मुक्तक का सुंदर संकलन
सुप्रसिद्ध कवियों की देशभक्ति कविताएँ
अटल बिहारी वाजपेयी की देशभक्ति कविताएँ
फ़िराक़ गोरखपुरी के 30 मशहूर शेर
दुष्यंत कुमार की 10 चुनिंदा ग़ज़लें
कैफ़ी आज़मी के 10 बेहतरीन शेर
कबीर दास के 15 लोकप्रिय दोहे
भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है? - भारतेंदु हरिश्चंद्र
पंच परमेश्वर - कहानी - प्रेमचंद
मिर्ज़ा ग़ालिब के 30 मशहूर शेर

