युवा हूँ मैं - कविता - रामानंद पारीक
सोमवार, जनवरी 12, 2026
नई सोच की उड़ान हूँ
मैं संस्कारों का मान हूँ,
दो पीढ़ी को साध सके जो
मैं ऐसी पहचान हूँ।
अदम्य सा उत्साह हूँ
मैं श्रेष्ठता की राह हूँ,
समुद्र सा अथाह हूँ
नदी का मैं प्रवाह हूँ।
जिज्ञासा हूँ, प्रत्याशा हूँ
साहस की परिभाषा हूँ,
विश्वगुरु हो देश हमारा
जन-जन की अभिलाषा हूँ।
आज़ाद हूँ विचारों से
पर बंधा हूँ मैं संस्कारों से,
खेता हूँ मैं नाव को अपनी
हिम्मत की पतवारों से।
मैं साज़ हूँ, आवाज़ हूँ,
क़लम हूँ मैं अल्फ़ाज़ हूँ,
तकता जिसकी ओर जमाना
मैं ऐसा अंदाज़ हूँ।
अपरिमित क्षमता है मेरी
राष्ट्र पर ममता है मेरी,
धर्म जाति में बाँट ना पाओ
दृष्टि में समता है मेरी।
संयम, तप और त्याग हूँ
मैं परिवर्तन का राग हूँ,
एक अरब चालीस करोड़
उम्मीदों का चिराग़ हूँ।
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