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श्री महाकाल तांडव स्तुति - संस्कृत काव्य - बाल कृष्ण मिश्रा
श्री महाकाल तांडव स्तुति - संस्कृत काव्य - बाल कृष्ण मिश्रा
रविवार, जनवरी 11, 2026
सदाशिव शंकर महेश्वर महेश,
परमेश्वर त्रिलोचन त्रयंबक त्रिनेत्र।
ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय,
भव-भय हरन भोलेनाथ, जय जय शिव शंकराय॥
प्रचंड-तांडव-नृत्य-रत, दिगंबर-विश्वरूपम्,
शून्य-हृदय-निवासी, पूर्ण-ब्रह्म-अनुपमम्।
अनादि-अनंत-कालचक्र-अधिपति, महादेव-महंतम्,
क्षण-भंगुर-लीलाधारी, विभु-अविनाशी-अनंतम्॥
जटा-कटाह-संभ्रम-भ्रमन्-निलिम्प-निर्झरी,
शीश-शशांक-धवल-दीप्ति, अमृत-रस-झरी।
व्याल-कराल-माल-कंठ, भस्म-विलेपन-धारी,
वैराग्य-पुंज-महायोगी, त्रिपुर-अरि-विनाशकारी॥
त्रिशूल-धारिणी-शक्ति, न्याय-वज्र-प्रहारम्,
डमरू-नाद-गुंजित-ब्रह्मांड, सृजन-स्वर-सारम्।
महानाश-कुक्षि-स्थित, नूतन-सृष्टि-विधानम्,
रुद्र-भीषण-संहार, शिव-सौम्य-निर्माणम्॥
काल-काल-महाकाल, काल-जयी-अनामी,
चराचर-जगत-रक्षक, विश्वेश्वर-स्वामी।
करुणा-पारावार-शंभू, तारन-तरन-हारी,
शरण्य-चरण-कमल-अर्पित, जय-जय-पुरारी॥
ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय,
हर हर महादेव, जय शिव शंकराय॥
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