सोच युवाओं की - कविता - जयराम यादव

सोच युवाओं की - कविता - जयराम यादव | Hindi Kavita - Soch Yuvaaon Ki - Jairam Yadav. युवाओं पर कविता
नई सोच है, नई डगर है, आँखों में कुछ सपने हैं,
अपनी धुन में चलने वाले, मन में अरमान अपने हैं।
परंपरा को साथ लिए वे, नित नया सवेरा गढ़ते हैं,
दृढ़ संकल्प हृदय में लेकर, पथ पर आगे बढ़ते हैं।
हाथों की इन रेखाओं पर, तनिक नहीं विश्वास है,
अपने श्रम और सामर्थ्य पर, उनको अटूट विश्वास है।
ईश-कृपा को मन में धारे, सद्भावों का धाम लिए,
सोच-समझकर क़दम बढ़ाते, सत्य-सही का नाम लिए।
बेझिझक प्रश्नों को पूछें, माँ भारती की सच्ची संतान,
अधिकारों का ज्ञान जिन्हें है, कर्तव्यों का भी पूर्ण भान।
रूढ़ प्रथाओं की दीवारें, धैर्य व साहस से ढहाते हैं,
नव विचार की राह बनाकर, नया मुक़ाम बनाते हैं।
उज्ज्वल कल की ख़ातिर देखो, अपना सर्वस्व लगाते हैं,
विघ्न-बाधाएँ आएँ जितनी, हँसकर उन्हें हटाते हैं।
सबके पावन भावों का वे, सहृदय सम्मान निभाते हैं,
विविध रंगों की इस धरती में, प्रेम के दीप जलाते हैं।
अपनी योग्यता के बल पर, नित नव विहान रचते हैं,
आचरण और स्वास्थ्य सँवारकर, भारत का मान बढ़ाते हैं।
ज्ञान-विज्ञान, श्रम और साहस—इनको अपना साथी करते,
नई सदी के नए क्षितिज पर, नए शिखर वे नित ही चढ़ते।
आज के युवा साधारण नहीं, आने वाले कल की आस हैं,
देश का गौरव, समाज की रीढ़, भारत की धड़कन-श्वास हैं।
इनके हाथों में है भविष्य, इनसे भारत की पहचान,
इनके सपनों से ही होगा, भारत का नव-निर्माण!

जयराम यादव - नालिया, कच्छ (गुजरात)

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