अनकही - कविता - राहुलदेव‌ गौतम

अनकही - कविता - राहुलदेव‌ गौतम | Hindi Kavita - Ankahi - Rahul Dev Gautam
मैंने जाना कि दो लोगों के बीच
कोई भी चीज़ हमेशा नहीं रहती 
सिवाय इस बात के, 
कि हमारे बीच बहुत कुछ था।

मैंने यह भी जाना कि बहुत कुछ,
कुछ भी नहीं रह जाता 
बहुत कुछ को धीरे धीरे बचाने में।

राहुलदेव‌ गौतम - ग़ाज़ीपुर (उत्तर प्रदेश)

Instagram पर जुड़ें



साहित्य रचना को YouTube पर Subscribe करें।
देखिए साहित्य से जुड़ी Videos