सोनू यादव - इलाहाबाद (उत्तर प्रदेश)
जो ज़ाहिर-ओ-बातिन से ही बेयाद दिखा है - ग़ज़ल - सोनू यादव
रविवार, अक्टूबर 11, 2026
अरकान : मफ़ऊल मुफ़ाईलु मुफ़ाईलु फ़ऊलुन
तक़ती : 221 1221 1221 122
जो ज़ाहिर-ओ-बातिन से ही बेयाद दिखा है,
वह शख़्स ज़माने में यूँ आज़ाद दिखा है।
वो सीने में पोशीदा जली आग रखे हैं,
कब शहर में कोई भी यहाँ शाद दिखा है।
जो हँसता ही रहता था सदा सारे जहाँ में,
वो दिल के मकाँ में ही तो बर्बाद दिखा है।
जब जिस्म ढहा तब कहीं जा रूह बसी है,
ऐसे ही तो मैयत पे वह आबाद दिखा है।
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