जो ज़ाहिर-ओ-बातिन से ही बेयाद दिखा है - ग़ज़ल - सोनू यादव

जो ज़ाहिर-ओ-बातिन से ही बेयाद दिखा है - ग़ज़ल - सोनू यादव | Ghazal - Jo Zaahir O Baatin Se Hi Beyaad Dikhaa Hai - Sonu Yadav
अरकान : मफ़ऊल मुफ़ाईलु मुफ़ाईलु फ़ऊलुन
तक़ती : 221  1221  1221  122

जो ज़ाहिर-ओ-बातिन से ही बेयाद दिखा है,
वह शख़्स ज़माने में यूँ आज़ाद दिखा है।

वो सीने में पोशीदा जली आग रखे हैं,
कब शहर में कोई भी यहाँ शाद दिखा है।

जो हँसता ही रहता था सदा सारे जहाँ में,
वो दिल के मकाँ में ही तो बर्बाद दिखा है।

जब जिस्म ढहा तब कहीं जा रूह बसी है,
ऐसे ही तो मैयत पे वह आबाद दिखा है।


Instagram पर जुड़ें



साहित्य रचना को YouTube पर Subscribe करें।
देखिए साहित्य से जुड़ी Videos