क्यों? - कविता - रिंकी

क्यों? - कविता - रिंकी | Hindi Kavita - Kyon - Rinki
क्यों भी कितना अजीब शब्द है,
जो ख़ामोशी में भी शोर मचा देता है।
इंसान को अपने ही ख़्यालों से लड़ने पर मजबूर कर देता है,
जवाब ढूँढ़ने की आदत दे देता है,
पर अक्सर सवालों में ही उलझा देता है।
बताता कुछ नहीं,
बस वजह पूछने का सिलसिला छोड़ जाता है।
सुकून से इसका शायद कोई पुराना रिश्ता नहीं,
तभी तो हर बात के पीछे एक नई वजह तलाश करवाता है।
कभी “क्यों” रिश्ते तोड़ देता है,
कभी वही “क्यों” किसी को समझने की वजह बन जाता है।
कभी आँखों में शिकायत बनकर उतरता है,
कभी किसी की ख़ामोशी पढ़ना सिखा जाता है।
क्यों कोई अपना होकर भी दूर हो जाता है?
क्यों कोई पास होकर भी अपना नहीं लगता?
क्यों कुछ बातें कहने के बाद भी अधूरी रह जाती हैं,
और कुछ ख़ामोशियाँ सब कुछ कह जाती हैं?
क्यों वक्त बदल देता है लोगों को,
या लोग बदल जाते हैं वक्त के साथ?
क्यों कुछ मुलाक़ातें उम्रभर याद रहती हैं,
और कुछ रिश्ते उम्रभर साथ होकर भी यादों में जगह नहीं बना पाते?
क्यों किसी की एक छोटी-सी बात पूरे दिन का सुकून छीन लेती है?
क्यों किसी की एक मुस्कान तमाम परेशानियों के बीच दिल को फिर से जीना सिखा देती है?
क्यों हम उन्हीं से जवाब चाहते हैं,
जिन्होंने हमें सवालों के सिवा कुछ दिया ही नहीं?
क्यों हम उन्हीं के पीछे चलते रहते हैं,
जिन्होंने कभी हमारे साथ चलना चुना ही नहीं?
शायद “क्यों” का कोई अंत नहीं,
शायद हर जवाब के पीछे एक और सवाल छिपा होता है।
शायद ज़िंदगी का ख़ूबसूरत होना भी इन्हीं अधूरे सवालों की वजह से होता है। 
क्योंकि हर “क्यों” का जवाब मिल जाए,
तो शायद कुछ महसूस करना ही ख़त्म हो जाए।
कुछ इंतज़ार, कुछ उम्मीद, कुछ अधूरे ख़्वाब—सब अपने मायने खो जाएँ।
मगर क्या ही ख़ूबसूरत पल होगा,
क्या ही वो दिन होगा,जब ये “क्यों” शिकायतों से निकलकर समझने की वजह बन जाएगा।
जब किसी के दूर जाने पर“क्यों छोड़ गए?” नहीं,“शायद उनकी भी कोई वजह रही होगी…”कहकर दिल मुस्कुरा पाएगा।
जब हर अधूरे सवाल का जवाब शब्दों में नहीं,
सुकून में मिलने लगेगा।
और तब शायद समझ आएगा—कि “क्यों” हमेशा जवाब माँगने के लिए नहीं होता, कभी-कभी “क्यों”हमें ख़ुद से मिलाने के लिए भी होता है।
शायद उस दिन सवाल ख़त्म नहीं होंगे, बस उनसे शिकायत करना ख़त्म हो जाएगा।
और फिर ये छोटा-सा शब्द—“क्यों”दर्द की वजह नहीं, ज़िंदगी को समझने की सबसे ख़ूबसूरत वजह बन जाएगा।


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