बेटी आँगन में - कविता - सुरेन्द्र कल्याण बुटाना

बेटी आँगन में - कविता - सुरेन्द्र कल्याण बुटाना | Hindi Kavita - Beti Aangan Mein - Surender Kalyan Butana. Hindi Poem On Daughter. बेटी पर कविता
तेरे आने से
महका ये आँगन,
खिल उठीं फ़िज़ाएँ।

तेरे बिना सब था
सूना-सूना,
तू मुस्कराए,
बादल भी खिल जाएँ।

इस आँगन में
तेरे क़दम
जैसे लक्ष्मी जी आएँ।

मेरी बेटी,
तू जब जाएगी
घर पराए,
मेरी साँसें भी
हो जाएगी रुसवाय।

तेरे चाव से
आज मैं हूँ
एक अध्याय,
वरना ख़ाक-सा
अभिप्राय। 

सुरेन्द्र कल्याण बुटाना - बुटाना, करनाल (हरियाणा)

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