मन को केन्द्रित करो लक्ष्य में - मुक्तक - शिव शरण सिंह चौहान 'अंशुमाली'

मन को केन्द्रित करो लक्ष्य में - मुक्तक - शिव शरण सिंह चौहान 'अंशुमाली' | Muktak - Man Ko Kendrit Karo. मन पर मुक्तक रचना
मन को केन्द्रित करो लक्ष्य में पथ स्वमेव मिल जाएगा।
एकाहारी प्रभु का चिन्तन मार्ग तुम्हें दिखलाएगा।
सोते जगते बैठ प्रसाधन खाते पीते प्रश्न पढ़ो - 
होगे सफल 'अंशुमाली' का आशिष तुम्हें जगाएगा।

शिव शरण सिंह चौहान 'अंशुमाली' - फ़तेहपुर (उत्तर प्रदेश)

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