गुल - रामपुर (उत्तर प्रदेश)
क्यूँ मुझे फूल पसंद हैं? - कविता - गुल
मंगलवार, मई 05, 2026
राहों से गुज़रते हुए
किनारों पर चलते हुए
यूँही तुम अचानक से रुक जाती हो
देखती हो जब किसी खिलती हुई कली को
क्या तुम्हें फूल पसंद हैं?
हाँ मुझे फूलों का खिलना पसंद है
उनकी कोमलता पसंद है
उनकी ख़ुशबु पसंद है
उनका महकना पसंद है
फूल किसे पसंद नहीं होते
शायद उन्हें जो फूलों को मसल देते हैं
लेकिन फूल तो उन हाथों को भी ख़ुशबु से भर देते हैं
इस लिए भी मुझे फूल पसंद हैं
काश फूल हमेशा खिले रहते
काश फूल हमेशा खिले रहते
लेकिन आती है तेज़ धूप
जो मुरझा देती है उनको
छीन लेती है उनकी ख़ुशबु
गिर जाती हैं पत्तियाँ सूखकर
सड़क पर
उसी सड़क किनारे
देख रही हूँ मैं उन फूलों को
हाँ मुझे फूल ऐसे भी पसंद हैं
फूल मुझे तब भी पसंद आता है
जब कोई घुटने के बल बैठकर
एक फूल पेश करता है
और सामने वाला जब फूल नहीं लेता है
तो वो फूल उसी प्रेमी के गले लगकर
उसका प्रेम बढ़ाता है
रोता है साथ में उसके
उसको हिम्मत देता है
कुछ दूरी पर खड़ी मैं देख रही उस प्रेमी को
और सोच रही हूँ इस लिए मुझे फूल पसंद हैं
एक नाराज़ दोस्त को
जब दूसरा दोस्त बिना माफ़ी माँगे
बिना किसी गिले शिकवे के देता है बस एक फूल
और फिर सामने वाला भी हँस देता है
मैं मुस्कुरा रही हूँ ये देखकर
शायद इसीलिए मुझे फूल पसंद हैं
अपने बालों में फूलों को लगाना पसंद है
हाथों में फूलों को पहनना पसंद है
मुझे मेरे घर की क्यारी में लगे फूल पसंद है…
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