मन की गाँठ - कविता - मोहम्मद रब्बानी

मन की गाँठ - कविता - मोहम्मद रब्बानी | Hindi Kavita - Man Ki Gaanth - Mohammad Rabbani
दो दोस्त आमने सामने खड़े थे,
कुछ मन मोटाव भी है।

वे एक-दूसरे को देख रहे,
आपस में।
बोलने की चाह में,
मन ही मन, पहले वो...
नहीं, पहले वो...

आख़िर में, इशारे से ही...
हाय बोला और
मन में उत्पन्न इस स्मृति को
विराम दे दिया।

मोहम्मद रब्बानी - अलीगढ़ (उत्तर प्रदेश)

Instagram पर जुड़ें



साहित्य रचना को YouTube पर Subscribe करें।
देखिए साहित्य से जुड़ी Videos