मोहम्मद रब्बानी - अलीगढ़ (उत्तर प्रदेश)
मन की गाँठ - कविता - मोहम्मद रब्बानी
शनिवार, मई 02, 2026
दो दोस्त आमने सामने खड़े थे,
कुछ मन मोटाव भी है।
वे एक-दूसरे को देख रहे,
आपस में।
बोलने की चाह में,
मन ही मन, पहले वो...
नहीं, पहले वो...
आख़िर में, इशारे से ही...
हाय बोला और
मन में उत्पन्न इस स्मृति को
विराम दे दिया।
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