निर्मल कुमार गुप्ता - सीतापुर (उत्तर प्रदेश)
चलो दोस्ती कर लें - कविता - निर्मल कुमार गुप्ता
गुरुवार, फ़रवरी 27, 2025
चलो दोस्ती कर लें।
द्बेष-भाव में,क्या रक्खा है?
क्यूँ न, गुफ़्तुगू कर लें।
चंद दिन की, ज़िंदगी में,
फिर से कुछ, मस्ती कर लें।
नफ़रत में, जीना भी क्या?
हमसफ़र चलो, बंदगी कर लें।
प्रेम का आग़ोश पाकर,
नफ़रत शर्मा जाती है।
प्रेम की बगिया में, बहारें,
खिलखिलाती हैं।
चलो दोस्ती कर लें।
द्बेष-भाव में, क्या रक्खा है?
क्यूँ न, गुफ़्तुगू कर लें।
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