नीलम सरोज 'खुशबू' - जौनपुर (उत्तर प्रदेश)
श्री गणेश - कविता - नीलम सरोज 'खुशबू'
शनिवार, सितंबर 07, 2024
हे जगवन्दन, गौरी नन्दन,
प्रथम पूज्य हो तुम दुख भंजन।
एकदन्त हो तुम अष्टविनायक,
कृपा करहुँ प्रभु हे,गणनायक।
माँ उमा के आँख के तारे,
भक्तों के तुम काज सँवारे।
मंगल करन तुम दुख तारन,
शीश कटा तो हुए गजानन।
कार्तिकेय भातृ तुम्हारे, पिता देव महेश,
पल में विघ्न हरते कहलाते विघ्नेश।
मोदक लड्डू तुमको भाते,
बैठ मूषक की सवारी करते।
लम्बोदर हो तुम बुद्धि-देवता,
ऋद्धि-सिद्धि के भाग्य-विधाता।
मातु आज्ञा में गज-सिर धरे कहलाए वक्रतुण्ड,
निश-दिन भक्त शीश नवाते और लगाते त्रिपुण्ड।
'नीलम' अरज करे तुम्हारी भवानी-पुत्र गणेश,
बाधाएँ सब दूर करें, मिटे हिय का क्लेश।
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