हेमन्त कुमार शर्मा - कोना, नानकपुर (हरियाणा)
धरे रहे सब ख़्वाब - कविता - हेमन्त कुमार शर्मा
बुधवार, जनवरी 31, 2024
धरे रहे सब ख़्वाब,
आँखें बोझिल थी।
आसूँ की सौग़ात,
सावन को भी मात,
हाथों में नहीं हाथ,
छूटा स्नेह का साथ,
पर मधुर रहा बोल,
शायद कोयल थी।
काग़ज़ के हर शब्द,
हृदय ने किए ज़ब्त,
प्रेम वेम की ख़ब्त,
उतरी सिर से थी,
सुने जब वो अपशब्द,
अँखियाँ सजल थी।
सच्ची थी साए की धूप,
उपेक्षा से मुरझाया रूप,
दूरी के शब्द होते कुरूप,
सूख गया स्नेह कूप,
अधरों पे हौसला रहा,
वृत्ति निश्चल थी।
धरे रहे सब ख़्वाब,
आँखें बोझिल थी।
साहित्य रचना को YouTube पर Subscribe करें।
देखिए साहित्य से जुड़ी Videos
साहित्य रचना कोष में पढ़िएँ
विशेष रचनाएँ
दीपावली विशेष रचनाएँ: कविता, गीत, दोहे और मुक्तक का सुंदर संकलन
सुप्रसिद्ध कवियों की देशभक्ति कविताएँ
अटल बिहारी वाजपेयी की देशभक्ति कविताएँ
फ़िराक़ गोरखपुरी के 30 मशहूर शेर
दुष्यंत कुमार की 10 चुनिंदा ग़ज़लें
कैफ़ी आज़मी के 10 बेहतरीन शेर
कबीर दास के 15 लोकप्रिय दोहे
भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है? - भारतेंदु हरिश्चंद्र
पंच परमेश्वर - कहानी - प्रेमचंद
मिर्ज़ा ग़ालिब के 30 मशहूर शेर

