माँ - कविता - कमला वेदी

माँ तेरे चरणों में मेरा सजदा है  
मेरी साँसों में तेरा अक्स बसता है।

कहाँ एक पल भी जुदा तू मुझ से,
धमनियों में मेरे, तेरा रक्त दौड़ता है।
तेरी आँखों का एक एक अश्क,
मेरी आँखों का अश्क पोछता है।
 
माँ तेरे चरणों में मेरा सजदा है,
मेरी साँसों में तेरा अक्स बसता है।

तेरा अंश मात्र ही नहीं हूँ मैं,
तेरा सम्पूर्ण साया मुझमें बसता है।
मेरी पल पल की रचना में माँ, 
तेरी भव्यता का अक्स रमता है।

माँ तेरे चरणों में मेरा सजदा है  
मेरी साँसों में तेरा अक्स बसता है।

तुझे बयाँ ना कोई कर सके,
ना जग में कोई तेरी समता है।
कोई क़लम तुझे लिख ना सके,
जो तुझमें हृदय और ममता है।

माँ तेरे चरणों में मेरा सजदा है  
मेरी साँसों में तेरा अक्स बसता है।

तेरे सूखे जुगल नयनों से भी,
नित प्रेम का झरना झरता है।
तू ईश्वर की सर्वोपरि कृति है,
ईश्वर भी तेरे रूप में रमता है।
 
माँ तेरे चरणों में मेरा सजदा है  
मेरी साँसों में तेरा अक्स बसता है।

कमला वेदी - खेतीखान, चम्पावत (उत्तराखंड)

साहित्य रचना को YouTube पर Subscribe करें।
देखिये हर रोज साहित्य से जुड़ी Videos