बुद्ध पूर्णिमा - दोहा - डॉ. राम कुमार झा "निकुंज"


था मन अशान्ति तज गेह को,निकल पड़ा सिद्धार्थ। 
बोधवृक्ष   नीचे      मिला , सत्य   शान्ति    परमार्थ।।१।।

दया   धर्म    करुणा    हृदय , सदाचार   तप  स्नेह।
पथिक   अहिंसा  बुद्ध सत्य , मुक्ति सुखी जग धेय।।२।। 

शान्तिदूत   सादर    नमन ,  मानवता      प्रतिमान।
बुद्ध  पूर्णिमा पुण्य  तिथि ,   नमन  बुद्ध   भगवान।।३।।

स्वारथ में मानव  विकल , किया प्रकृति   से    द्रोह।
हिंसा    छल    मिथ्या प्रकृति, बुद्ध   मार्ग  अवरोह।।४।।

लिया  जन्म   संसार  में , बस   मानव     कल्याण।
बुद्ध दशम अवतार  हरि , किया जगत    का  त्राण।।५।।

पुण्य दिवस  निर्वाण का , ब्रह्म  ज्ञान   प्रभु     बुद्ध।
त्रिविध   पाप  संताप  से , सत्य ज्ञान   मन     शुद्ध।।६।। 

रोग  शोक  भव  मोह  जग , लोभ  द्वेष  छल   राग। 
दिया मंत्र  प्रभु  मुक्ति   का ,  शान्ति  चित्त अनुराग।।७।।

शील  त्याग  गुण  कर्म   ही ,  साधन  हित   संसार।
नीति रीति सच   प्रीति  पथ , बुद्ध   ज्ञान    उपहार।।८।।

नश्वर तन  धन   लोक  में ,  अमर    गीत  उपकार।
बोध    ज्ञान   गौतम  गया  ,  शुद्ध   हृदय  आचार।।९।। 

हर  अन्धकार अज्ञान का , ज्योतिर्मय  कर  लोक।
चले   तथागत  कर्म पथ ,  सारनाथ      हर  शोक।।१०।। 

शरणागत  करता  नमन ,  विनती   यही   निकुंज। 
खिले चमन जग शान्ति का , मानवता   अलिगुंज।।११।।


डॉ. राम कुमार झा "निकुंज" - नव दिल्ली

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