संदेश
विधा/विषय "दुष्कर्म"
मन वेदना - दोहा - डॉ. राम कुमार झा "निकुंज"
गुरुवार, अक्टूबर 01, 2020
अहंकार निज बुद्धि का, तिरष्कार नित अन्य। दावानल अज्ञानता, करते कृत्य जघन्य।।१।। श्रवणशक्ति की नित कमी, कोपानल नित दग्ध। तर्क…
बलात्कार - कविता - सूर्य मणि दूबे "सूर्य"
गुरुवार, अक्टूबर 01, 2020
हैवानों की हवस का कब तक शिकार होंगी एक एक करते करते कितनी निर्भया जांन निसार होंगी। न तरस आता है उन्हें किसी पर उन्हें नियम कानून का…
आखिर कब तक? - कविता - संतोष सिंह
गुरुवार, अक्टूबर 01, 2020
सींची होगी जमीं, अश्रुओं की बरसात से। गुनहगार तेरा ये समाज है, इस कुकर्म बिसात से। दिल्ली, उन्नाव, हाथरस, ये क्या हो रहा है ? मां भार…
बलात्कार - कविता - मनोज यादव
शनिवार, सितंबर 12, 2020
दीवारों पर खाक बचे है अभियान के किसी की सिसकती बेटी मिली है सिवान में। किसी जंगली जानवर ने नही नोचा है उसे देह पर निशान पाये गये …
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