संदेश
एक और अर्थ - कविता - अमित राज श्रीवास्तव 'अर्श'
कभी-कभी एक स्मृति अपना चेहरा उतारकर हमारी तरफ़ रख देती है, और हम समझते हैं ये हम हैं। पर वो हम नहीं— हमारी सम्भावना होती है, जो किस…
मैं कौन हूँ? - कविता - विजय शर्मा एरी
मैं कौन हूँ, ये रहस्य अनंत, ना जिसका आरंभ, ना जिसका अंत। ना जन्म मुझे, ना मरण का भय, मैं अजर-अमर, मैं शाश्वत स्वयं। बम, मिसाइल, तोपें …
आत्मबोध - गीत (लावणी छंद) - संजय राजभर 'समित'
कोई कठिन जादू नहीं तू, न ही सरल छू मंतर है। इधर-उधर न खोज रे! ख़ुद को, तू अपने ही अंदर है। तू ही चैतन्य, तू ही सत्य, तू शाश्वत ज्योति प…
अकेले रहे तो समझ आया - कविता - नाजिया
अकेले रहे तो समझ आया, सब कुछ तो था, बस कोई अपना नहीं था। ख़ामोशी ने दर्द का राज़ बताया, और तन्हाई ने ख़ुद से मिलवाया। टूटे ख़्वाब भी रास…
मैं चला मैं ढूँढ़ने - कविता - सुष्मिता पॉल
मैं चला मैं ढूँढ़ने, कभी अपनों में, कभी ग़ैरों में, कभी मंदिर में, कभी पहाड़ों में, असीम शांति की खोज में, भटकता रहा राहगीर मैं, दर-दर …
अंतर्मन की खोज - कविता - चक्रवर्ती आयुष श्रीवास्तव
खोज रहा हूँ ख़ुद को भीतर, मौन लहर में गूँज समाई। भाव शिलाएँ चुपचाप खड़ीं, बूँद-बूँद रसधार बहाई॥ अंतःपुर की जाली झाँके, स्मृतियों की धूप…
मुझे नहीं चाहिए - कविता - सुरेन्द्र प्रजापति
मेरे पास कुछ भी नहीं है, जहाँ थोड़ी देर बैठ कर सुस्ता सकूँ न ईमानदार पसीने की महक न कोई सार्थक पंक्तियाँ कुछ निरर्थक शब्दों की आवाजाही …
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