हे हरिप्रिये नारायण की प्यारी - गीत - रजनीश तिवारी 'अनपढ़ माशूक़'

हे हरिप्रिये नारायण की प्यारी - गीत - रजनीश तिवारी 'अनपढ़ माशूक़' । Diwali Poetry - Hey Haripriye Narayan Ki Pyaari
हे हरिप्रिये नारायण की प्यारी
आ महालक्ष्मी सुन ले हमारी
मुझे धन वैभव दे ख़ुशियाँ ये सारी
द्वार तेरे दर पे है आया भिखारी
हे हरिप्रिये नारायण की प्यारी
आ महालक्ष्मी सुन ले हमारी...

मैं करूँ महिमामंडन यशोगान तेरा
स्वच्छ सुंदर जीवन हो नया मेरा
हे गृहलक्ष्मी विपदा हर सारी
हे धनलक्ष्मी हर विपदा हमारी
दुनियाँ तुझे पूजे पूजें मुरारी,
हे हरिप्रिये नारायण की प्यारी
आ महालक्ष्मी सुन ले हमारी...

है निर्धन ये दास तेरा बड़ा ही अजीब
अमीर हो धनवान कैसे है ये ग़रीब
भूखा ये नंगा है भुखमरी का मारा
ज़िन्दगी का हर सुख दे मुझे सारा
आ बिगड़ी बना दे अब तू हमारी,
हे हरिप्रिये नारायण की प्यारी
आ महालक्ष्मी सुन ले हमारी...

कीर्तन भजन हो न स्तुति ध्यान
मोह माया का बंधन है अभिमान
मुझे सच्ची श्रद्धा भक्ति का वरदान दे माँ
मुझे अपने चरण शरण में विश्राम दे माँ
चहुँओर हो माँ यश कीर्ति हमारी,
हे हरिप्रिये नारायण की प्यारी
आ महालक्ष्मी सुन ले हमारी...

रजनीश तिवारी 'अनपढ़ माशूक़' - रीवा (मध्यप्रदेश)

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