ग्रह दोष - लघुकथा - कुमार नवीन

ग्रह दोष - लघुकथा - कुमार नवीन | Hindi Kahani - Grah Dosh - Kumar Navin
बस्ती से शहर की ओर जाने वाली सड़क के पहले ही मोड़ पर ज़मीन पर आसन जमाए पंडित जी बैठते थे। जो भी दुखी ग्राहक आता, पत्रा देखकर उसके ग्रह दोष बताते और दोष निवारण के उपाय भी बताते। अनेक उपायों के साथ साथ बुध की दशा की शांति के लिए एक उपाय ज़रूर बताते कि बुधवार को गाय को अपने वज़न के बराबर हरा चारा खिलाओ तो बुध की ग्रह शांति अवश्य हो जाएगी। सड़क के पार दूसरी ओर खुला मैदान था जहाँ अक्सर एक बूढ़ी गाय भटकती हुई आ जाती और बुधवार के दिन कोई न कोई उसे हरा चारा दे जाता।  
एक दिन बड़े दीन हीन स्वर में गाय ने पंडितजी से कहा "हे विप्र, मैं तो प्रत्येक दिन सबको कल्याणमयी आशीष देती हूँ लेकिन आप लोगों से केवल बुधवार को ही चारा डालने के लिए कहते हो, जबकि मुझे भूख तो सातों दिन लगती है। क्या ये मेरा ग्रह दोष है? मेरे इस ग्रह दोष के निवारण का भी कोई उपाय आपके पास हो तो कृपापूर्वक मुझे बताएँ।"
गाय की मार्मिक व्यथा सुनकर पंडित निरुत्तर भी हो गया और शर्मिंदा भी क्योंकि उसके पास उपलब्ध संपूर्ण ज्योतिषशास्त्र में ऐसा एक भी उपाय नहीं था। 

कुमार नवीन - चंदौसी (उत्तर प्रदेश)

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