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श्री पार्वती शक्ति तांडव स्तुति - २ - संस्कृत काव्य - बाल कृष्ण मिश्रा
श्री पार्वती शक्ति तांडव स्तुति - २ - संस्कृत काव्य - बाल कृष्ण मिश्रा
शुक्रवार, सितंबर 25, 2026
जगज्जननी आदि शक्ति, आदि रूप धारिणी,
महाकाली महालक्ष्मी, महासरस्वती रूपिणी।
शैलपुत्री ब्रह्मचारिणी, चन्द्रघण्टा कल्याणी,
कूष्माण्डा स्कन्दमाता, कात्यायनी सुखदानी॥
कालरात्रि महागौरी, सिद्धिदात्री वरप्रदा,
नवदुर्गा नवशक्ति, सर्व सिद्धी दायिका।
दक्षकन्या सती साध्वी, शिवप्रिया मनमोहिनी,
पार्वती हिमवान पुत्री, सर्व मंगल कारिणी॥
सिंह वाहिनी त्रिनेत्र धारी, महिषासुर मर्दिनी,
धूम्रलोचन वधकारी, चण्ड-मुण्ड विनाशिनी।
रक्तबीज संहारी माता, रौद्र रूप धारिणी,
रणचण्डी महाकाली, काल सर्प गामिनी॥
डमरू बाजे शंख बाजे, बाजे मृदंग झांझरी,
तांडव नाचे आदि शक्ति, झुमे सकल सृष्टि री।
पाद प्रहार कम्प धरणी, गगन गूंजे गर्जना,
भयभीत देव दानव, करे विनीत प्रार्थना॥
जय भवानी जय कल्याणी, जय जगदम्बा कालिका,
बाल कृष्ण शीश नवाए, रक्षा करो अम्बे मातिका।
कृपा दृष्टि बनाए रखना, संकट सब दूर करो,
भक्ति भाव हृदय जगाए, सुख समृद्धि से झोली भरो॥
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