मीनाक्षी पँवार - बागपत (उत्तर प्रदेश)
आसमानी धरातल - कविता - मीनाक्षी पँवार
बुधवार, सितंबर 30, 2026
आसमाँ के पास भी है अपना धरातल,
जहाँ पर उछलते-थिरकते हैं बादल,
जहाँ डगमगाते हैं पंछी पवन में,
तड़ित के तरुवर हैं झूले गगन में,
जहाँ जन्म लेती हैं बारिश की बूँदें,
बने हैं जहाँ आसमानी घरौंदे,
जहाँ चाँद-तारों की आँख मिचौली,
जहाँ करता सूरज भी हँसी-ठिठौली,
वहीं पर तो बहती है आकाशगंगा,
रचयिता है जिसका अनादि-अनंता,
जहाँ ठौर ढूँढ़े हैं थककर यें आँखें,
गगन के धरातल के दृश्यों को देखे,
जहाँ चैन पाता है संतप्त-सा मन,
भला फिर क्यूँ चाहे ये भूमि से संगम।
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