टेक्निकल बच्चे और मैनुअल बाप - कविता - मदन लाल राज
गुरुवार, मई 14, 2026
मैं जिस पीढ़ी में पैदा हुआ,
बेटा बाप से सीखता भी था।
बाप बार-बार सिखाता था
और साथ में रीझता भी था।
आजकल का बाप बेटों से
मजबूरी में तकनीकी बातें पूछता है।
एक बार में जब समझ न आए,
तो बेटा खामखाँ ही खीझता है।
“पापा, आपको तो
इतना-सा भी नहीं आता!”
कहकर फ़ोन और कम्प्यूटर
इतनी तेज़ी से चलाता है
कि मैनुअल बाप फिर भी
समझ नहीं पाता।
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