मुँह मोड़ न जाना - गीत - सुशील कुमार

मुँह मोड़ न जाना - गीत - सुशील कुमार | Hindi Prem Geet - Munh Mod Na Jaanaa - प्रेम पर गीत कविता
कसमें खाकर, कसम धराकर, कसमों को फिर तोड़ न जाना,
पास बुलाकर, मन बहलाकर, मुझसे फिर मुँह मोड़ न जाना।

वर्षों का ये रिश्ता अपना।
चुन चुन करके गढ़ा है सपना।
कल को यदि मिल जाए मंज़िल,
हवा में पंछी-सा मत उड़ना।
वादे करके, राह दिखाकर, राहों में ही छोड़ न जाना।

चाहा तुझको हर पल मैंने।
तुझमें पाया पल-पल मैंने।
तेरी धड़कन की हर लय पर,  
बहा नदी-सा कल कल मैंने।
आँख मिलाकर, प्यार जताकर, मन का दर्पण तोड़ न जाना।

वर्षों के इस रिश्ते को तुम।
झूठे वादों से मत छलना।
संग चले जो पथ पर दोनों,
उन क़दमों को कल मत करना।
सपनों का यह नाज़ुक मोती, किरचों में तुम फोड़ न जाना।

अगर तुम्हें कल जाना होगा।
रिश्ता नया बनाना होगा।
मेरे सारे संवादों पर,
पूर्णविराम लगाना होगा।
तब मेरी दहलीज़ पे यादों, की परछाई छोड़ न जाना।


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