प्रतीक्षा - कविता - फैजान अहमद खान

प्रतीक्षा - कविता - फैजान अहमद खान | Hindi Kavita - Pratiksha - Faizan Ahmad Khan. प्रतीक्षा पर कविता
कितना कठिन है प्रतीक्षा करना,
राह देखते-देखते थक जाना,
फिर मिलने की उम्मीद करना
और इसी उम्मीद में पागल हो जाना।

ओ मेरे अबोध साथी!
कभी सुनो ये प्रतीक्षा की धुन,
जाग-जाग कर जिसे मैंने गुनगुनाया है,
जितनी बार तुमने मुझे जगाया है।


Instagram पर जुड़ें



साहित्य रचना को YouTube पर Subscribe करें।
देखिए साहित्य से जुड़ी Videos