नन्हें क़दम - गीत - डॉ॰ राम कुमार झा 'निकुंज'
रविवार, मार्च 22, 2026
नन्हे क़दमों से धरती पर, सपनों का विस्तार,
हँसी में झरते मोतियों-सा, निर्मल उसका प्यार।
मुट्ठी में सूरज बाँध चले, चाँद को करें इशारा,
बाल-मन का कौतुक देखो, जग लगे कितना प्यारा।
माँ की गोदी झूला बनती, पापा बनते घोड़ा,
तितली संग उड़ने की ज़िद, बादल से है जोड़ा।
मिट्टी में महल रचाता है, राजा बनकर हँसता,
उसके छोटे से संसार में, हर दुख पल सुख मोड़ा।
तोतली बोली में जैसे, सरगम गूँज उठे,
नन्ही उँगली थामे चलना, जीवन राग सधे।
आँखों में इंद्रधनुष सजा, सपनों का मेला,
हर पल रचता नई कहानी, मन का भोला रेला।
रूठे तो बादल बन जाए, हँसे तो धूप खिलाए,
नन्हे दिल की हर धड़कन, ममता गीत सुनाए।
बालपन की इस छाया में, प्रेम सुधा बरसती,
वात्सल्य की इस दुनिया में, हर पीड़ा भी हँसती।
साहित्य रचना को YouTube पर Subscribe करें।
देखिए साहित्य से जुड़ी Videos
साहित्य रचना कोष में पढ़िएँ
विशेष रचनाएँ
सुप्रसिद्ध कवियों की देशभक्ति कविताएँ
अटल बिहारी वाजपेयी की देशभक्ति कविताएँ
फ़िराक़ गोरखपुरी के 30 मशहूर शेर
दुष्यंत कुमार की 10 चुनिंदा ग़ज़लें
कैफ़ी आज़मी के 10 बेहतरीन शेर
कबीर दास के 15 लोकप्रिय दोहे
भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है? - भारतेंदु हरिश्चंद्र
पंच परमेश्वर - कहानी - प्रेमचंद
मिर्ज़ा ग़ालिब के 30 मशहूर शेर

