सजगता के प्रति - कविता - डॉ॰ अबू होरैरा

सजगता के प्रति - कविता - डॉ॰ अबू होरैरा | Hindi Kavita - Sajagata Ke Prati - Dr Abu Horaira. सजगता पर कविता। Hindi Poem On Vigilance
जब मरना ज़रूरी है 
तो लड़ना भी ज़रूरी है
निःशब्द लोगों के लिए जीवन क्या है?
केवल एक जीने की प्रक्रिया है
आए और गए
शब्द वालों के लिए जीवन
एक प्रतिक्रिया है
आए और छाए
गए तो भी भाए
इसलिए सुनों!
गतिशीलता को रुकने न दो
जीवन के मोल को, मोल लो
ख़ुद को तौल लो
करते तो सब ख़ुद के लिए हैं
आपने क्या किया अपने से अतिरिक्त
जिसने आपको ज़माने में किया हो सिद्ध।

डॉ॰ अबू होरैरा - हैदराबाद (तेलंगाना)

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