श्री गणेश चतुर्थी - दोहा छंद - डॉ॰ राम कुमार झा 'निकुंज'

श्री गणेश चतुर्थी - दोहा छंद - डॉ॰ राम कुमार झा 'निकुंज' | Ganesh Chaturthi Doha - Shri Ganesh Chaturthi, गणेश चतुर्थी पर दोहे
चरण कमल श्रद्धा नमन, करूँ गजानन आज। 
उमातनय परमेश भज, स्वस्ति लोक गणराज॥ 

रक्तांबर पूजन करूँ, लम्बोदर विघ्नेश। 
गजमुख वरदायक नमन, जय गणेश गिरिजेश॥ 

एकदन्त गिरिजा तनय, शरणागत करुणेश। 
रक्ताम्बर तनु देह है, दयावन्त अखिलेश॥ 

मंगलेश गौरीतनय, गणनायक बुद्धीश। 
वाहन मूषिकराज है, जगपालक जगदीश॥ 

पंचदेव में पूज्य जो, गणभूतों के नाथ। 
सकल मनोरथ पूर्ण हो, गणपति का हो साथ॥ 

गणनायक सानंद कर, कर सुखमय संसार। 
दे पापों को दूर कर, विश्व शान्ति उपहार॥ 

राग द्वेष छल लोभवश, फँसे हुए जग लोग। 
बुद्धि विनायक त्राण कर, तजें स्वार्थ हठयोग॥ 

माँ बाप की प्रदक्षिणा, गणपति देव प्रधान। 
ज्ञान बुद्धि सच तेज बल, दान करो भगवान॥ 

देवासुर ऋषिगण मनुज, तन मन करते ध्यान। 
सब विघ्नों को पारकर, पाते हैं सम्मान॥ 

दीप जला मैं नित करूँ, विनत आरती थार। 
हर निकुंज संताप प्रभु, भवसागर से पार॥ 

हे विघ्नेश्वर क्षमा कर, ज्ञानहीन कृत पाप। 
सत्पूजन तेरा करूँ, होऊँ मैं निष्पाप॥ 

गणपति बप्पा मोरया, आओ मेरे द्वार। 
हरो सकल विपदा सकल, भवसागर से पार॥ 

एक दो तीन चार स्वर, गणेेश जय जयकार। 
विघ्नेश्वर वन्दन नमन, महिमा अपरम्पार॥ 

क्षमादान गणपति करो, क्षमा करो अपराध। 
बुद्धि ज्ञान परहित सुयश, पौरुष बढ़े अबाध॥ 


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