श्री गणेश चतुर्थी - दोहा छंद - सरिता श्रीवास्तव 'श्री'

हाथ जोड़ वंदन करूँ, गौरी नन्दन गणेश।
दुनिया भव बाधा हरो, हर लो‌ सकल क्लेश।।

वक्र तुण्ड महाकाय प्रभू, सर्व देव आदि देव।
शुभ कार्य पूजन प्रथमा, देवों के हैं देव।।

रूप प्यारा गणपति का, एक दन्तीय कहाय।
कृपा करें जिस पर प्रभू, सफल काज हो जाय।।

चतुर्थी दिवस गणेश का, उत्सव है धूमधाम।
मन्नत पूर्ण गणेश करें, दें ख़ुशियाँ ईनाम।।

रिद्धि सिद्धि दो पत्नियाँ, सह बिराजें गणेश।
जग पर कृपा है इनकी, भव सागर देवेश।।

गणेश चतुर्थ उत्सव मने, मूर्ति प्रतिष्ठा गणेश।
दस दिवस की धूम रहे, घर-घर पूज्य गणेश।।

गणपति मस्तक हस्त रहे, सर्वदा तेरा साथ।
ख़ुशियों संग सुबह रहे, कभी न छूटे साथ।।

प्रिय व्यंजन मोदक है, अवश्य लगाओ भोग।
गणपति अति प्रसन्न रहें, मन इच्छा बने योग।।

शुभ कार्य तब पूज्य है, श्री गणेश अनुष्ठान।
आराधन गणपति करें, श्री कलश प्रतिष्ठान।।

मूषक पर सवार रहें, परिक्रमा पितु मात।
बुद्धि दाता विघ्नहर्ता, फलदायक सौगात।।

दिव्य रूप अवतार है, भक्त पूज्य साकार।
परब्रह्म 'श्री' आकार है, अजन्मा निराकार।।

सरिता श्रीवास्तव 'श्री' - धौलपुर (राजस्थान)

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