कैसे करूँ दिल की बात - कविता - अंकुर सिंह

साथ छोड़ते देख लोगों को,
कैसे करूँ अपने दिल की बात।
समय कठिन है बचके रहना यारों,
महामारी लगाए बैठी है घात।।

चहुँओर फैली इसकी माया,
मन में लोगों के डर इसका छाया।
है इसके बड़े-बड़े अत्याचार,
मास्क, सैनिटाइजर इसके उपचार।।

तुम्ही रक्षा करो अब हमारी हे नाथ,
दूधमुँहे तक हो रहे है अनाथ।
हाथ जोड़कर हम करें तेरी विनती,
न मिले विश्व में संक्रमिंतों की गिनती।।

कैसे कहूँ यारों अपने दिल की बात,
ये बीमारी दे रही सबको नित्य अधात। 
बहुत ज़रूरी हो तो घर से निकलना,
लोगों से दो गज दूरी रख के चलना।।

मत रो तुम प्यारे, वक़्त भी ये गुज़र जाएगा।
ज़रा सावधानी रखले, इससे तू बच जाएगा।।

दूर करेंगे प्रभु अब इसको धीरे-धीरे,
जल्दी मिलेंगे गले हम मित्रगण सारे।
कैसे कहूँ अब मैं अपने दिल की बात, 
अब तो सब है बाबा विश्वनाथ के हाथ।।

अंकुर सिंह - चंदवक, जौनपुर (उत्तर प्रदेश)

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