मेरी हृदय कामना - कविता - अनिल भूषण मिश्र

हे विशाल उदार हृदय महामना,
हो चहुँमुखी विकास आपका।
ये है मेरी हृदय कामना,
ये है मेरी हृदय भावना।

थे मेरे कर्म कहीं कुछ अच्छे,
कुछ भाव बने सद् भावना,
अस्तु मिला मुझे संसर्ग आपका,
मैं तुच्छ अकिंचन बन गया प्रेरणा।

सत्य कहूँ सखा पारस हो आप,
स्पर्श पाकर मैं लौह स्वर्ण बना,
हो चहुँमुखी विकास आपका।
ये है मेरी हृदय कामना,
ये है मेरी हृदय भावना।

राह सदा तुमने उचित दिखलाई,
हो विकास जीवन का वह युक्ति बतलाई,
होकर निःस्वार्थ सबकी किया भलाई,
इन भावों की भूषण करें अर्चना,
हो चहुँमुखी विकास आपका।
ये है मेरी हृदय कामना,
ये है मेरी हृदय भावना।

टूटते थकते दिल में नित उमंग जगाई,
लक्ष्य अभी भी संभव है विश्वास कराई,
मित्र 'नर में बसते नारायण' की तुम हो सच्चाई,
ईस्वर से है मेरी एक प्रार्थना,
हो चहुँमुखी विकास आपका।
ये है मेरी हृदय कामना,
ये है मेरी हृदय भावना।

अनिल भूषण मिश्र - प्रयागराज (उत्तर प्रदेश)

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