जनाजा उठ गया होता - मुक्तक - राहुल सिंह "शाहावादी"

जनाजा उठ गया होता, 
          अगर देखा न होता। 
नजर के तीर का मारा, 
          पङा  रोता  न होता। 
तुम्हारी इन अदाओं ने,
          शरारत की है मुझसे।
सनम तेरे इसारे से, 
          लगाया प्यार मे गोता।

राहुल सिंह "शाहावादी" - जनपद, हरदोई (उत्तर प्रदेश)

Instagram पर जुड़ें



साहित्य रचना को YouTube पर Subscribe करें।
देखिए साहित्य से जुड़ी Videos