सलिल सरोज - मुखर्जी नगर (नई दिल्ली)
मर्यादा - ग़ज़ल - सलिल सरोज
बुधवार, अक्टूबर 07, 2020
औरत को तमाशा बनाए रखिए
और फिर जुबाँ को दबाए रखिए
राम को पूजा कीजिए हर घर में
और सीताओं को सताए रखिए
जो अधिकार की बातें करने लगें
तो तमाम उलझने गिनाए रखिए
खूँ कीजिए इनका जब दिल चाहे
और टीका सिर पर लगाए रखिए
न कोई दलील न ही कोई मुक़दमा
हर बाज़ी इस तरह बिछाए रखिए
औरत ही औरत के लिए ना बोलें
इसी तरह इनको सिखाए रखिए
बराबर में आने की जुर्रत हुई कैसे
इन्हें लूट कर मर्यादा बचाए रखिए
साहित्य रचना को YouTube पर Subscribe करें।
देखिए साहित्य से जुड़ी Videos
साहित्य रचना कोष में पढ़िएँ
विशेष रचनाएँ
दीपावली विशेष रचनाएँ: कविता, गीत, दोहे और मुक्तक का सुंदर संकलन
सुप्रसिद्ध कवियों की देशभक्ति कविताएँ
अटल बिहारी वाजपेयी की देशभक्ति कविताएँ
फ़िराक़ गोरखपुरी के 30 मशहूर शेर
दुष्यंत कुमार की 10 चुनिंदा ग़ज़लें
कैफ़ी आज़मी के 10 बेहतरीन शेर
कबीर दास के 15 लोकप्रिय दोहे
भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है? - भारतेंदु हरिश्चंद्र
पंच परमेश्वर - कहानी - प्रेमचंद
मिर्ज़ा ग़ालिब के 30 मशहूर शेर

