सीख अमिताभ बच्चन से - आलेख - अंकुर सिंह

बॉलीवुड के शहंशाह अमिताभ का जन्म 11 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद (वर्तमान का प्रयागराज) जिले में हिंदी साहित्य के एक बड़ी हस्ती हरिवंश राय बच्चन के घर हुआ था।

महानायक अमिताभ बच्चन ने जीवन में काफी संघर्ष करते हुए बड़ी सफ़लता को पाया है। आज के युवा वर्ग को काफी कुछ सीखने लायक हैं बच्चन साहब के संघर्षपूर्ण जीवन से, अमिताभ ने कभी किसी काम को छोटा या बड़ा नहीं समझा, बस हर काम में अपना 100% दिया, इसका एक उदाहरण है जब दिवालिया होने पर टीवी प्रोग्राम के काम के आफर पर उसे छोटा न समझ बड़े पर्दे से छोटे पर्दे पर टीवी प्रोग्राम "शो कौन बनेगा करोड़पति" में काम किया। वहीं आज की युवा पीढ़ी स्कूल के पढ़ाई के बाद ही लाखों के पैकेज की चाहत में आए छोटे नौकरी को ठुकरा देती है, बाद में उनमें से ही अधिकांश युवा बड़ी नौकरी के चाहत में बेरोजगारी का दंश झेलते रहते है, बड़े बुजुर्गों से भी ये कहते हुए मैंने सुना है कि "सामने आए थाली को कभी ठुकराना नहीं चाहिए" इसलिए जब तक बड़ी नौकरी की आफर ना हो हाथ में, तब तक युवा वर्ग को चाहिए की शुरू में आए नौकरी के आफर को स्वीकार करते हुए अच्छे कैरियर के लिए प्रयत्न करें।

अमिताभ बच्चन कभी अपने ऊपर किए गए दूसरों के अहसान को नहीं भुलाया, अमिताभ ने कई सभाओं में साफ-साफ कहा कि उनके बुरे समय में रिलायंस के मालिक धीरूभाई ने उनकी मदद करनी चाही, कूली मूवी में लगे उनके चोट के इलाज के दौरान  तत्कालीन भारतीय सरकार ने उनकी मदद की, जबकि आजकल के दौर में आम इंसान भी काम निकल के बाद अहसान मानना तो दूर, पहचानने से भी कतराता है।

अमिताभ को कभी रेडियो पर मोटी आवाज के वजह से ठुकरा दिया गया था, शुरू के अनेकों फ्लाप मूवी करने के बाद इनके बारे में कहा जाने लगा कि  मनहूस हैं अमिताभ बच्चन, लेकिन इन्होने कभी अपनी हिम्मत ना हारी और आज सफलता के उच्च पद पर है, इसलिए दोस्तों कोई जरूरी नहीं कि आप आज ठुकराए जा रहे है, तो कल का भविष्य आपका नहीं है, बस आप सब अपना काम को अपनी ईमानदारी से करते रहिए।

''जिंदगी एक सफ़र है मिलेगी कभी सफलता तो, कभी असफलता भी, तुम मत डरना, ना रोकना तुम अपने कदमों को बस चलते रहना, बस चलते रहना।।"

अंकुर सिंह - चंदवक, जौनपुर (उत्तर प्रदेश)

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