बच्चे की दुनिया - कविता - श्याम नन्दन पाण्डेय

बच्चे की दुनिया - कविता - श्याम नन्दन पाण्डेय | Hindi Kavita - Bachhe Ki Duniya. Motivational Poem About Dreams. सपनों पर प्रेरक कविता
एक बच्चा मेले के रास्ते में 
पिता की अंगूलियाँ पकड़कर
इठलाता है जैसे पूरी दुनिया
मुट्ठी में भर ली हो।
हाथ छोड़कर भागना चाहता है 
खिलौनो के पीछे, 
पर भीड़ में बिछड़ने का
ख़्याल आ जाता है 
और कस के पकड़ लेता है 
पिता की उंगलियाँ।
पिता के कंधे पर बैठकर बच्चा
देखता है दुनिया को ऊँचाई से 
जैसे किसी चोटी पर बैठा हो,
भय, शांकाओ से परे निर्भीक,
जैसे आसमान को 
पैरों के नीचे कर लिया हो।
ज़मीन तो जैसे बहुत नीचे छूट गई हो,
इतनी ऊँचाई से वो
पिता का चेहरा भी नहीं देख पाता 
और पिता के पैर तो जैसे पीछे छूट गए हों।
फिर उबने लगता है ऐसी ऊँचाई से,
और बैठ जाता है पिता के सर पर अपना सर रख कर 
दोनों पैर पिता के कंधे से फँसाए हुए।
डर जाता है ऐसी ऊँचाई से,
जहाँ से दिखती नहीं ज़मीन, 
मेले, पिता का चेहरा और अपने।
दुनिया देख ली कंधे पर बैठे-बैठे,
उतर कर पकड़ता है फिर ऊँगली कस कर,
जैसे बहुत ऊँचाई पर पहुँचने का मर्म जान गया हो।
जान गया हो बिछड़ने का दर्द और ऊँचाई का आकर्षण॥


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