शिक्षक - कविता - अंकुर सिंह

प्रणाम उस मानुष तन को,
शिक्षा जिससे हमने हैं पाया।
मातृ-पितृ के बाद, 
जिसकी है हम पर छाया

पुनः उनके श्रीचरणों में नमन,
जो शिक्षा दे शिक्षक कहलाएं।
अच्छे बुरे का फर्क बतला
उन्नति का मार्ग हमें दिखलाएं।।

शिक्षक, अध्यापक और गुरु संग,
आचार्य जैसे है अनेकों पदनाम।
कभी भय तो, कभी प्यार जता,
करते हमें सिखाने का काम।।

कभी डांट तो कभी फटकार कर,
कुम्हार के भांति हमें पकाया।
अपने लगन और अथक मेहनत से,
शिक्षक ने हमें सर्वश्रेष्ठ बनाया।।

गुरु तो है,
ब्रह्मा, विष्णु और महेश से भी महान।
गुरु की दी शिक्षा ही हमें,
दिला रही आज सम्मान।।

शिक्षा के बिना तो,
ये मानव जीवन है बेकार।
शिक्षक ने हमें शिक्षित कर,
कर दिया अनेकों उपकार।।

अपनी शिक्षा से सफल हमें देख,
शिक्षक का होता हर्षित मन।
पांच सितंबर क्या, मैं तो करता हरदम
अपने गुणीजन शिक्षकों को सादर नमन।

अंकुर सिंह - चंदवक, जौनपुर (उत्तर प्रदेश)

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