महामारियां - कविता - सतीश श्रीवास्तव

पहले भी आईं थीं
तमाम महामारियां
चलीं गईं जैसी आईं थीं
तमाम आपदाओं से भी
जूझे और जीत हमारी हुई
अब कोरोना को
हम ही हरायेंगे
जिंदा रहेंगे
उससे जीतकर
हिल जाए धरती आते रहें भूकंप
हम जीतेंगे
देखता रह जायेगा भूकंप अवाक्
बरसाओ ऊपर से ओले
नीचे से कर दो गैस लीक
देखना हम बचेंगे जीतकर क्योंकि
हम तो पैदा ही हुए हैं
हराने के लिए
आजू बाजू से भेज दो
आंधी और तूफान
देखना हम फिर खड़े मिलेंगे तुम्हें
पहले की तरह
अब ये टिड्डी दल ?
पता नहीं क्या सोच कर आया है हमें हराने
एक फुंफकार में हो जाएगा धरासाई
हम फिर मुस्करायेंगे खड़े होकर
हम ही तो जीते हैं हर हाल में
हम पैदा ही हुए हैं जीतने के लिए
बार बार हार जाने के बाद भी।

सतीश श्रीवास्तव - करैरा, शिवपुरी (मध्यप्रदेश)

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