प्रशान्त 'अरहत' - शाहाबाद, हरदोई (उत्तर प्रदेश)
इतने ज़हीन और ये इतने हसीन लोग - ग़ज़ल - प्रशान्त 'अरहत'
शनिवार, अक्टूबर 03, 2026
तक़ती : 221 2121 1221 212
इतने ज़हीन और ये इतने हसीन लोग
मिलते कहाँ हैं आप–जैसे बेहतरीन लोग
करते थे रोज़ कॉल जो सोते थे बाद में
करते नहीं हैं आज वो मैसेज भी सीन लोग
हमने तो उन को छोड़ दिया उन के हाल पर
शायद उन्हें भी मिल गए हों बेहतरीन लोग
सोता ही रह गया जो मैं चादर ये ओढ़कर
ढूँढ़ेंगे फ़िर भी मेरी सभी आस्तीन लोग
हम जो चले गए, अगर, सब छोड़–छाड़ के
करते रहेंगे बाद में सब खोज-बीन लोग
कहता हूँ मैं सभी से कि ‘अरहत’ नहीं हूँ मैं
करते नहीं हैं आज ये मुझ पर यक़ीन लोग
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